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Monday, November 11, 2013

आप को ऐसे तो न जाना था- चानो दा!




आप को ऐसे तो न जाना था- चानो दा! बम झेल लिया, गोली भी झेल गए और इस अदने से हर्ट अटैक को न झेल सके कमांडर। न, मैं नहीं मानता कि आप उठ कर चल दिए हमारे बीच से जब हमें आपकी सबसे ज्यादा जरुरत थी।
इंटर का रिजल्ट आया था। राज्य भर में टॉप करने के बाद जब आपसे मिला तो सबसे पहले आपने अपने हाथ जेब में डाल जो निकला रख दिया मेरे जेब में- जो मिठायी खा लियहे। अब तो नौकरी भी करने लगा हूं चानो दा, मिठायी के पैसे उधार रह गए हैं आपके पास। आके लौटा जाईये न, चानो दा।
जब भी मिलते नाक पकड़ लेते- लाल सलाम बुलवाकर ही छोड़ते। इतनी आत्मीयता, इतने स्नेह से दुबारा किसी ने लाल सलाम नहीं बुलवाया है चानोदा।
बेगूसराय में वामपंथ से रोमांस करने वाले अंतिम पीढ़ी के नेता थे आप चानोदा। एआईएसएफ से जुड़े कॉलेज के दिनों में। कुछ दिन नक्सली आंदोलन से प्रभावित हुए और फिर एक बार जो जनसेवा दल की पार्टी वर्दी को पहना तो जीवन भर लपेटे रखा।
जब भी देखा आपको। उसी खाकी लाल रंग के वर्दीनुमा शर्ट और खाकी पेंट नीचे से थोड़ा उठा हुआ ही पहने देखा। न कभी नेताओं वाला ड्रेस, न कभी विधायक-सांसदी लड़ने का शौक। चुपचाप गरीबों की लड़ाई को हर मोर्चे पर चाहे एटक हो, जनसेवा दल, पार्टी हो आप लड़ते रहे चानो दा।
पार्टी के ज्यादातर बुजुर्ग नेताओं को कहते देखा है- नये युवक पार्टी से नहीं जुड़ रहे लेकिन आपको कभी इसकी शिकायत करते नहीं सुना। आपने हमेशा नये लड़कों को पार्टी से जोड़ने, उन्हें संघर्ष के रास्ते पर आगे बढ़ने को प्रेरित किया। चाहे वो जनसेवा दल से हो या बड़े-बड़े खेल आयोजनों को करवाकर या फिर उन लड़कों की दुसरी समस्याओं में साथ खड़े रहकर। आप ही ये कर सकते थे चानो दा। इसलिए भी आपकी  जरुरत थी। कि आप ही पार्टी और जनता के बीच की कड़ी का काम कर सकते थे, कि आप ही थे जिनके बिना आज बीहट का बीन टोली से लेकर रिफाईनरी के कामगार मजदूर तक खुद को अनाथ सा महसूस कर रहे हैं।
आप ही थे न चानो दा, जिसने बेगूसराय के उस घोर सामंती परिवेश में विधवा विवाह के समारोह को उत्सव के बतौर मनाने का साहस किया और जब लोगों ने ताना दिया तो खुद के बेटे तक को उसी समारोह में शादी करने को राजी कर लिया। आप कथनी-करनी और सोचने तक में सच्चे कॉमरेड थे चानो दा।
जब ज्यादातर पार्टी नेता कैडरों खासकर शहीद पार्टी कैडरों को भूल जाते हैं। आप लगातार उनके परिवार के लिए केयर टेकर बने रहे। शहीद कैडरों की कहानी को किताबबद्ध कर उन्हें इतिहास में सहेजते रहने का साहसी और बेहद जरुरी काम आपने ही किया चानो दा। यहां तक कि पार्टी नेताओं के रक्षा कवज भी बने रहे पूरी दबंगई से।
आप पार्टी के कमांडर थे चानो दा। सच्चे अर्थों में कॉमरेड। आपने जैसी जिन्दगी चाही जिया। हम लोग भगोड़े किस्म के इंसान हैं, आप रहते तो खींच-खींच कर हमें भी पार्टी के कामों में लगाए रहते लेकिन वो कड़ी आपके साथ ही टूट सा गया है। अब कोई जबरदस्ती हमें पार्टी कामों में नाक पकड़ इन्वॉल्व करने वाला नहीं रहा।
आपके साथ ही ये परंपरा भी विदा हुआ। कहने का मन नहीं चानो दा आपको आखरी सलाम।
Tum hi so gye daastan kahte-kahte

काश, हम सबके पास भी साहस होता- एक पार्टी कमांडर की तरह जिन्दगी बिताने का।
आपके जिन्दगी को सलाम चानो दा।

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