Tuesday, August 9, 2011

घुटन

खोने दो मुझे चांदनी रातो को
दर्द को दर्द बने रहने दो
मेरे आंसू
पलकों पर टिके है कब से
इन्हे पानी समझ टिके रहने दो
अंधेरी रात
कुछ धुँआ सा उठा है दिल में
इन्ही धुँओं में घुलने दो
मत देखो मेरे जख्मो पर
ये घाऊ नासूर हैं
इन्हे नासूर बने रहने दो
कौन आएगा डालने स्नेह का तेल
इस बुझाते चिराग में
अब
में बुझता हु तो
बुझने दो
मैं कब से चुपचाप सुन रहा
आगे भी चुपचाप रहने दो
जब तक छिपा रहेगा
ये राजे गम
अविनाश पर्दा परा रहने दो

Friday, August 5, 2011

तुम्हे पसंद नहीं
मेरी कविता
मेरी दोस्ती
और मे
ढूंढे नहीं मिलती तुम्हें
प्यार की बाते
मेरी कविता
दोस्ती
और मुझे में
समझा न सका तुमको
प्यार ही नहीं जिंदगी और
भी है कुछ जिंदगी मे
गरीबी है
शोषण है
और है
पत्थर तोरति औरत
इलाहाबाद के पथ पर
एक और है
ऊँची इमारतें
और उनके छाया मे झोपअधि
भी
है भआरी असमानता जिंदगी मे
प्यार ही नहीं केवल जिंदगी मे
संगहार्स है क्रोध है
अवसाद है जिन्दगी मे
अविनाश जीना है तो एन सबको मिला कर जिओ फिर देखो क्या नहीं जिंदगी मे

Thursday, August 4, 2011

आज बात करतें हैं एस नए सहर के बारे मे
हर तरफ आप धापी है लेकिन कोई ऐसा नहीं मिलेगा आपको जो अपने फुर्सत के दो पल आपके साथ साझा करे
तो भाई मुझे तो पटना बहुत मिस हो रहा है
पटना और वहाँ मौर्या की मस्ती
आह>>> मे यहाँ ज न उ के पास रहता हूँ<
यहाँ मन बहलाने के सभी उपकरण मौजूद तो है लेकिन गाँधी मैदान की वो बात कहाँ
पटना कॉलेज और उनिवेर्सित्य की वो मस्ती
मे फिर कहूँगा
आह>>>>
यहाँ दोस्त तो बन रहे हैं लेकिन जितना दिल्ली के बारे में सुना था उतना पाया नहीं
दिल्ली कइ दोस्त मुझे माफ़ करना
ये मेरा होम सिकनेस भी हो सकता है

Monday, July 4, 2011

मै तीन महीनो के बाद पटना आया हूँ
इतना दिन कवी भी पटना से दूर नहीं रहना हो पाया था
लेकिन इतने दिनों के बाद आने पर यहाँ हो रहे बदलाव को मै साफ़ महसुसू कर रहा हूँ
सच है जब तक आप किसी से दूर नही जाते उसके बदलाव को भी नहीं देख पातेअब तो दुःख इस बात का है की पटना से दूर जाना पर रहा है

Saturday, July 2, 2011

मै दिल्ली से पटना आ गया हूँ
अब दिल्ली के बारे में यहाँ से सोचता हूँ तो देखता हूँ सही लोग भागे जा रहे हैं कोई किसी से ये रुक के पूछना तक नही चाहता की क्यों भागे जा रहे हो हर कोई बस भागना chahta है
कवी कुछ देर रुक के पीछे भी देखो मेरे दोस्त कितने लोग छुट्टे चले जा रहे हैं

Friday, May 20, 2011

१स्त टीम इन city

दोस्तों मई दिल्ली में हु यहाँ मुझे दिल्ली नही मिल रहा है आप बताओ उसे कहाँ धुंधू??

कुछ चीजों का लौटना नहीं होता....

 क्या ऐसे भी बुदबुदाया जा सकता है?  कुछ जो न कहा जा सके,  जो रहे हमेशा ही चलता भीतर  एक हाथ भर की दूरी पर रहने वाली बातें, उन बातों को याद क...